जन लोकपाल बिल की विरोधी केन्द्र सरकार
बाबा अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के अनशन एवं सत्याग्रह पर केन्द्र सरकार का विरोधी रवैया इस देश की जनता की समझ से परे है । सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि चाहते हैं कि लोकपाल में पर्याप्त शक्तियाँ निहित हों और वह सरकार की कठ्पुतली बनकर न रह जाय, तथा जो कालाधन देश के बाहर चोरों ने भेजा है वह राजकीय सम्पत्ति घोषित हो, एवं कालेचोरों को मृत्युदण्ड या कम से कम आजीवन कारावास की सज़ा हो । परन्तु केन्द्र सरकार के लोग चाहते हैं कि उनके धन पर केवल टैक्स लगाया जाय और मामूली सज़ा दी जाय । उन चोरों पर इतनी रहमदिली का क्या कारण हो सकता है । सरकार इन चोरों और देशद्रोहियों के प्रति इतनी दयालु क्यों है ? कहीं ऐसा तो नहीं कि इन्हीं में से कुछ बडी मछलियों को जाल में फँसने का दर है । प्रतिपक्ष की पार्टियाँ भी इस गंभीर मुद्दे पर लगभग मौन ही हैं । यदि सरकार और मुख्यरूप से कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तो निश्चित ही जनता उन्हें सबक सिखायेगी ।
बाबा अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के अनशन एवं सत्याग्रह पर केन्द्र सरकार का विरोधी रवैया इस देश की जनता की समझ से परे है । सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि चाहते हैं कि लोकपाल में पर्याप्त शक्तियाँ निहित हों और वह सरकार की कठ्पुतली बनकर न रह जाय, तथा जो कालाधन देश के बाहर चोरों ने भेजा है वह राजकीय सम्पत्ति घोषित हो, एवं कालेचोरों को मृत्युदण्ड या कम से कम आजीवन कारावास की सज़ा हो । परन्तु केन्द्र सरकार के लोग चाहते हैं कि उनके धन पर केवल टैक्स लगाया जाय और मामूली सज़ा दी जाय । उन चोरों पर इतनी रहमदिली का क्या कारण हो सकता है । सरकार इन चोरों और देशद्रोहियों के प्रति इतनी दयालु क्यों है ? कहीं ऐसा तो नहीं कि इन्हीं में से कुछ बडी मछलियों को जाल में फँसने का दर है । प्रतिपक्ष की पार्टियाँ भी इस गंभीर मुद्दे पर लगभग मौन ही हैं । यदि सरकार और मुख्यरूप से कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तो निश्चित ही जनता उन्हें सबक सिखायेगी ।