Saturday, 25 June 2011

चोरों की हमदर्द केन्द्र सरकार

जन लोकपाल बिल की विरोधी केन्द्र सरकार
बाबा अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के अनशन एवं सत्याग्रह पर केन्द्र सरकार का विरोधी रवैया इस देश की जनता की समझ से परे है । सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि चाहते हैं कि लोकपाल में पर्याप्त शक्तियाँ निहित हों और वह सरकार की कठ्पुतली बनकर न रह जाय, तथा जो कालाधन देश के बाहर चोरों ने भेजा है वह राजकीय सम्पत्ति घोषित हो, एवं कालेचोरों को मृत्युदण्ड या कम से कम आजीवन कारावास की सज़ा हो । परन्तु केन्द्र सरकार के लोग चाहते हैं कि उनके धन पर केवल टैक्स लगाया जाय और मामूली सज़ा दी जाय । उन चोरों पर इतनी रहमदिली  का क्या कारण हो सकता है । सरकार इन चोरों और देशद्रोहियों के प्रति इतनी दयालु क्यों है ? कहीं ऐसा तो नहीं कि इन्हीं में से कुछ बडी मछलियों को जाल में फँसने का दर है । प्रतिपक्ष की पार्टियाँ भी इस गंभीर मुद्दे पर लगभग मौन ही हैं । यदि सरकार और मुख्यरूप से कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तो निश्चित ही जनता उन्हें सबक सिखायेगी ।

Sunday, 5 June 2011

कालाचोर

खुला रखते दरो दिल दोस्त से परदा नहीं करते
न पूरा कर सकें ऐसा कोई वादा नहीं करते
लगी हो आग गुलशन में दरख़्तों पे क़हर बरपा
हम ऐसे वक़्त हुस्नो इश्क़ की चर्चा नहीं करते ॥
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भारत के इस लोकतंत्र में फैला भ्रष्टाचार है
काले चोरों के पंजे में फँसा हुआ सरदार है       ॥

दिग्गी राज बेलगाम हो संतों को ठग कहते हैं
ओसामा लादेन को ओसामा जी पग पग कहते हैं
कोई पूछे कांग्रेस का ये क्या शिष्टाचार है               
काले चोरों के पंजे में फँसा हुआ सरदार है       ॥

गाँधी बाबा तेरे बंदर घुस आए संसद के अंदर
राजनीति के गलियारों से कुर्सी चढकर बने सिकंदर
संतों को बंदरघुडकी चोरों की जयजयकार है  
काले चोरों के पंजे में फँसा हुआ सरदार है       ॥

कांग्रेस का झंडा लेकर तेरे बंदर हुए खडे हैं
हमको बतलाओ क्या अंग्रेजों से भी ये दुष्ट बडे हैं
इन दुष्टों से तेरी अहिंसा फिर क्यों जाती हार है
काले चोरों के पंजे में फँसा हुआ सरदार है       ॥

चार जून को दिल्ली में जन जन पर अत्याचार हुआ
जनशाही का मानवीय मूल्यों का उपसंहार हुआ
लगता है इस देश में रहकर जीना ही बेकार है
काले चोरों के पंजे में फँसा हुआ सरदार है       ॥