खुला रखते दरो दिल दोस्त से परदा नहीं करते
न पूरा कर सकें ऐसा कोई वादा नहीं करते
लगी हो आग गुलशन में दरख़्तों पे क़हर बरपा
हम ऐसे वक़्त हुस्नो इश्क़ की चर्चा नहीं करते ॥
=====================
भारत के इस लोकतंत्र में फैला भ्रष्टाचार है
काले चोरों के पंजे में फँसा हुआ सरदार है ॥
दिग्गी राज बेलगाम हो संतों को ठग कहते हैं
ओसामा लादेन को ओसामा जी पग पग कहते हैं
कोई पूछे कांग्रेस का ये क्या शिष्टाचार है
काले चोरों के पंजे में फँसा हुआ सरदार है ॥
गाँधी बाबा तेरे बंदर घुस आए संसद के अंदर
राजनीति के गलियारों से कुर्सी चढकर बने सिकंदर
संतों को बंदरघुडकी चोरों की जयजयकार है
काले चोरों के पंजे में फँसा हुआ सरदार है ॥
कांग्रेस का झंडा लेकर तेरे बंदर हुए खडे हैं
हमको बतलाओ क्या अंग्रेजों से भी ये दुष्ट बडे हैं
इन दुष्टों से तेरी अहिंसा फिर क्यों जाती हार है
काले चोरों के पंजे में फँसा हुआ सरदार है ॥
चार जून को दिल्ली में जन जन पर अत्याचार हुआ
जनशाही का मानवीय मूल्यों का उपसंहार हुआ
लगता है इस देश में रहकर जीना ही बेकार है
काले चोरों के पंजे में फँसा हुआ सरदार है ॥
No comments:
Post a Comment